Wednesday, May 12, 2010

!! श्री दुर्गा कवच !!

!! श्री दुर्गा कवच !!
ऋषि मर्कंडे ने पूछा जभी !
दया करके ब्रह्माजी बोले तभी !!
के जो गुप्त मंत्र है संसार में !
हैं सब शक्तियां जिसके अधिकार में !!
हर इक का जो कार सकता उपकार है !
जिषे जपने से बेडा ही पर है !!
पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का !
जो हर काम पुरा करे सवाली का !!
सुनो मर्कंडे मैं समझाता हूँ !
मैं नवदुर्गा के नाम बतलाता हूँ !!
कवच कि मैं सुन्दर चोपाई बना !
जो अत्यंत हैं गुप्त देयुं बता !!
नव दुर्गा का कवच यह, पढे जो मन चित लाये !
उष पे किसी प्रकार का, कभी कष्ट न आये !!
कहो जय जय जय महारानी कि !
जय दुर्गा अष्ट भवानी कि !!
पहली शैलपुत्री कहलावे !
दूसरी भ्रम्चारनी मन भावे !!
तीसरी चंद्रघंता शुभ नाम !
चौथी कुश्मंदा सुखधाम !!
पांचवी देवी अस्कंद माता !
छाती कात्यायनी विख्याता !!
सातवी कालरात्रि महामाया !
आठवी महागौरी जग जाया !!
नौवी सिद्धिरात्रि जग जाने !
नव दुर्गा के नाम बखाने !!
महासंकत में बन में रण में !
रोग कोई उपजे निज तन में !!
महाविपति व्योहार में !
मान चाहे जो राज दरबार में !!
शक्ति कवच को सुने सुनाये !
मन कामना सिद्ध नर पाए !!
चामुंडा है प्रेत पर, वैष्णवी गरुड़ असवार !
बैल चढी महेश्वरी, हाथ लिए हथ्यार !!
कहो जय जय जय महारानी कि !
जय दुर्गा अष्ट भवानी कि !!
हंस सवारी बरही कि !
मोर चढी दुर्गा कुमारी !!
लक्ष्मी देवी कमल आसीना !
ब्राह्मी हंस चढी ले विना !!
इश्वरी सदा बैल असवारी !
भक्तन कि करती रखवारी !!
शंख चक्र शक्ति त्रिशुला !
हल मुसल कर कमल के फुला !!
दैत्य नाश करने के कारन !
रुप अनेक किन हैं धारण !!
बार बार चरनन सिर नून !
जगदम्बे के गुण को गाऊँ !!
कष्ट निवारण बलशाली माँ !
दुष्ट संहरण महाकाली माँ !!
कोटी कोटी माता प्रणाम !
पुरान कि जो मेरे काम !!
दया करो बल्शालिनी, दस के कष्ट मिटाओ !
चमन कि रक्षा करो सदा, सिंह चढी माँ आओ !!
कहो जय जय जय महारानी कि !
जय दुर्गा अष्ट भवानी कि !!
अग्नि से अग्नि देवता !
पुराभ दिशा में येंदरी !!
दक्षिण में बरही मेरी !
नैरित्य माँ खडग धारिणी !!
वायु से माँ मृग वाहिनी !
पश्चिम में देवी वरिनी !!
उत्तर में माँ कौमरीजी !
ऐसन में शूल धरीजी !!
ब्रहामानी माता अर्श पर !
माँ वैष्णवी इश फर्श पर !!
चामुंडा दश दिशाओं में, हर कष्ट तुम मेरा हरो !
संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!
सन्मुख मेरे देवी जिया !
पचे हो माता विजैया !!
अजीता कड़ी बाएं मेरे !
अपराजिता दायें मेरे !!
उद्योतिनी माँ शिखा कि !
माँ उमा देवी सिर कि ही !!
मालाधारी ललाट कि, और ब्रकुती कि माँ यश्यास्विनी !
ब्रकुती के मध्य त्रय्नेत्र, यम् घंटा दोनो नासिका !!
कलि कपोलों कि कर्ण, मूलों कि माता शंकरी !
नासिका में अंश अपना, माँ सुगंध तुम धरो !!
संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!
ऊपर वे निचे होतों कि !
माँ चुर्च्का अमृत कलि !!
जीभा कि माता सरस्वती !
दांतों कि कुमारी सटी !!
इश कुंठ कि माँ चंदिका !
और चित्रघंता घंटी कि !!
कामाक्षी माँ थोडी कि !
माँ मंगला इश बनी कि !!
ग्रीवा कि भद्रकाली माँ !
रक्षा करे बलशाली माँ !!
दोनो भुजाओं कि मेरे, रक्षा करे धनु धरनी !
दो हाथों के सब अंगों कि, रक्षा करे जग तरनी !!
शुलेश्वरी, कुलेश्वरी, महादेवी शोक विनाशानी !
छाती स्तनों और कन्धों कि, रक्षा करे जग वासिनी !!
हृदय उदार और नाभि कि, कटी भाग के सब अंग कि !
गुम्हेश्वरी माँ पूतना, जग जननी श्यामा रंग कि !!
घुटनों जन्घून कि करे, रक्षा वो विंध्यवासिनी !
तुख्नों वे पावों कि करे, रक्षा वो शिव कि दस्नी !!
रक्त मांस और हदियों से, जो बना शारीर !
आतों और पिट वाट में, भरा अग्ना और नीर !!
बल बूढी अंहकार और, प्रण अपन समन !
सैट राज तम के गुणों में, फँसी है यह जान !!
धर अनेकों रुप ही, रक्षा करियो आन !
तेरी कृपा से ही माँ, चमन का है कल्याण !!
आयु यश और कीर्ति धन, सम्पति परिवार !
ब्रह्मणि और लक्ष्मी, पार्वती जग तर !!
विद्या दे माँ सरस्वती, सब सुखों कि मूल !
दुष्टों से रक्षा करो, हाथ लिए त्रिशूल !!
भैरवी मेरी भार्या कि, रक्षा करो हमेश !
मान राज दरबार में, देवें सदा नरेश !!
यात्रा में दुःख कोई न, मेरे सिर पर आये !
कवच तुम्हारा हर जगह, मेरी करे सहाए !!
है जग जननी कर दया, इतना दो वरदान !
लिखा तुम्हारा कवच यह, पढे जो निश्चय मान !!
मन वांछित फल पाए वो, मंगल मोड़ बसाए !
कवच तुम्हारा पढ़ते ही, नवनिधि घर आये !!
ब्रह्माजी बोले सुनो मर्कंडे !
यह दुर्गा कवच मैंने तुमको सुनाया !!
रह आज तक था गुप्त भेद सारा !
जगत कि भलाई को मैंने बताया !!
सभी शक्तियां जग कि करके एकत्रित !
है मिति कि देह को इह्से जो पहनाया !!
चमन जिश्ने श्राध से इसको पढ़ जो !
सुना तो भी मुह माँगा वरदान पाया !!
जो संसार में अपने मंगल को चाहे !
तो हरदम यही कवच गता चला जा !!
बियाबान जंगल दिशाओं दशों में !
तू शक्ति कि जय जय मनाता चला जा !!
तू जल में तू थल में तू अग्नि पवन में !
कवच पहन कर मुस्कुराता चला जा !!
निडर हो विचार मन जहाँ तेरा चाहे !
चमन कदम आगे बढ़ता चला जा !!
तेरा मान धन धम इश्से बढेगा !
तू श्राध से दुर्गा कवच को जो गए !!
यही मंत्र यन्त्र यही तंत्र तेरा !
यही तेरे सिर से ही संकट हटायें !!
यही भुत और प्रेत के भय का नाशक !
यही कवच श्राध वे भक्ति भाध्ये !!
इशे नित्प्रती चमन श्राध से पढ़ कर !
जो चाहे तो मुह माँगा वरदान पाए !!
इश स्तुति के पथ से पहले कवच पढे !
कृपा से आधी भवानी कि, बल और बूढी बढे !!
श्राध से जपता रहे, जगदम्बे का नाम !
सुख भोगे संसार में, अंत मुक्ति सुखधाम !!
कृपा करो मातेश्वरी, बालक चमन नादाँ !
तेरे दर पर आ गिरा, करो मैया कल्याण !!
!! जय माता दी !!

1 comment:

vijay said...

aapka yah kavach bahut hi sundar hai.
aapse nivedan hai ki isme kuch matra oo ki galti hai unhe thoda samaz kar sudhar kar le -jai mata di