Friday, November 29, 2013

Remedies for a weak Moon

1. Never take a silver gift or accept silver as donation
2. Donate Silver - if you can't afford, then even donating a small thread of silver is enough - do this once/twice a year
3. Donate milk and don't drink milk on Monday
4. Forget any donations that you give, don't remember anything that you may have donated. Thank the person who accepted your donation and never be egoistic.
5. Eat coconut, wear white clothes, doing anulom-vilom breathing (for Sun & Moon), keep small plants in the North of the house
 

Birth stone and gem stone need

Birth stone and gem stone need

Dear Friends,

We always feel curious for the need of birth stones or the Gem stones. We also put on any ring without knowing the benefit or harm of the stone ring. Friends, our fingures are four in number and each one symbolises different planets.We must not wear any stone without knowing the purpose and if it is benefitial for us or not. We must always consult any good astrologer for the purpose. The days and times are also specified to put them on. The metal in which the rings or chain pendants are to be put on, must be kept in mind.Some people are not able to put on Gem stones due to unavailablity or else reason, so substitutes are also recommended. Silk clothes or many other things like chants etc are also useful in many cases, for the benefit of any person.

I would suggest you all to do as directed by your Spiritual guide / astro consultant.

We are often asked for precious or semi precious birth stones. Now we try to suggest as per the requirement and pocket of the person. If a person can put on and purchase a real birth stone, we guide a real one, otherwise, we try to guide for a semi precious stone or some other alternative for the birth stone to the person.

Tuesday, November 26, 2013

फलीत में लग्न कुंडली में नीच राशी में ग्रह , कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में होने से ग्रह का फल :-

फलीत में लग्न कुंडली में नीच राशी में ग्रह , कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में होने से ग्रह का फल :-
१. यदी लग्न कुंडली सूर्य नीच राशी में हो कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में होतो जातक को राज्य से धन लाभ होता है तथा जातक को सभी प्रकार का सुख प्राप्त होगा .

२. चंद्रमा इसका अपवाद है, नीच का चन्द्रमा नवमांश में उच्च का नही होता है .
...
३. यदी लग्न कुंडली में मंगल नीच का हो कीन्तू नवमांश में उच्च का होतो, जातक नौकरी या व्यवसाय में प्रारम्भ में असफलता देखता है , कीन्तू अंत में सफल हो जाता है .

४. यदी लग्न कुंडली में बुध नीच राशी में हो कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में हो तो, जातक सामान्य से अधीक बुध्धीमान होता है, जातक को व्यापार में अधीक सफलता मीलेगी , साथ ही धन भी मीलेगा .

५. यदी लग्न कुंडली में गुरु नीच राशी में हो , कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में होतो, जातक को सरकार से धन लाभ होता है, शीशा में प्रगती करता है, सुख, सम्मान , धन के साथ ही यह जातक ग्राम , नगर , या राज्य का मुखीया हो सकता है .

६. यदी लग्न कुंडली में शुक्र नीच राशी में कीन्तू नवमांश में उच्च राशी में होतो जातक खेती में उन्नती करेगा , खेती के उत्पादों से लाभ पाता है तथा धनी हो जाता है .

७. यदी लग्न कुंडली में शनी नीच राशी में हो , लेकीन नवमांश में उच्च राशी में होतो, जातक घर से दूर रहेगा , तथा उसे शत्रुओ से व चोरो से भय होगा , साथ ही कष्टों का सामना करना पड़ता है.

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए उपाय

१. बजरंग बली को लाल या पीले रंग के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाने चाहिए !! इन फूलों में कमल, गेंदा, गुलाब आदि विशेष महत्व रखते हैं !! हनुमानजी की पूजा या मंदिर में शुद्धता एवं पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए !! ध्यान रखें हनुमानजी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन का तिलक लगाना चाहिए !!
२. हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करना श्रेष्ठ उपाय है !!
३. सुबह के समय हनुमानजी प्रसाद के रूप में गुड़, नारियल, लड्डू चढ़ाया जाना चाहिए!!
४. दोपहर के समय बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है !!
५. शाम के समय हनुमानजी को फल जैसे आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए !!...
६. बजरंग बली के श्रृंगार में या चोला चढ़ाते समय तिल के तेल या चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर लगाना चाहिए !!
७. भगवान को भोग लगाने के बाद भक्त को प्रसाद अन्य भक्तों में वितरित करके स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए !!
८. सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी के निमित्त विशेष पूजन-अर्चन करना चाहिए !! इन दिनों में बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है !!

Saturday, November 23, 2013

हर रोज बोलें बस, हनुमान के ये 11 नाम मंत्र..रुके काम फौरन होगें पूरे



'संकट कटै-मिटै सब पीराजो सुमिरै हनुमत बलबीरागोस्वामी तुलसीदास द्वारा इस चौपाई से किया गया संकटमोचक हनुमान का सुमिरन उनके मंगलमय स्वरूप व शक्तियों को भी उजागर करता है। श्री हनुमान के पावन चरित्र का स्मरण मात्र ही मनोबल और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला होता है।
आज के रफ्तारभरे जीवन में हर रोज भारी तनावों से दो-चार होना पड़ता है। लिहाजा हर इंसान राहत के दो पल खोजता है। ऐसे में अशांति और कलह से मुक्त होने के लिए धार्मिक उपाय आसान और श्रेष्ठ साबित होते हैं। जिनमें श्री हनुमान का मनवचन व कर्मों की पावनता का ध्यान निर्भयता के साथ मन को आश्वस्त और शांत रखता है। जिससे कार्यसिद्धि की हर बाधा दूर होती है।
श्री हनुमान का शनिवारमंगलवारपूर्णिमा के साथ हनुमान जयंति या रूप चौदस (25 अक्टूबर) परध्यान विशेष मनोरथ सिद्ध करता ही हैलेकिन आसान उपायों में हर रोज नीचे लिखें 11 नाम मंत्रों का स्मरण बताए गए पूजा उपायों से करना कार्यसिद्धि सुनिश्चित करता है।
श्री हनुमान की प्रतिमा पर तेल-सिंदूर चढ़ाकर गंधअक्षतलाल फूल व नारियल चढ़ाने के साथ घी व शक्कर मिले आटे का लड्डूकेलाजामफल भोग में अर्पित कर पूजा करें। पूजा के बाद इन नाम मंत्रों का स्मरण कर धूप व दीप आरती करें-
ऊँ आञ्जनेयाय नम:

ऊँ महावीराय नम:

ऊँ हनूमते नम:

ऊँ मारुतात्मजाय नम:
ऊँ महाबल पराक्रमाय नम:

ऊँ रामदूताय नम:

ऊँ सर्वदु:ख हराय नम:

ऊँ सर्वबन्धविमोक्त्रे नम:
ऊँ सर्वमन्त्र स्वरूपाय नम:
ऊँ मनोजवाय नम:
ऊँ दृढव्रताय नम:

Thursday, August 2, 2012

हर बुधवार बोलें यह गणेश मंत्र..सारी चिंताएं होंगी दूर

चिंता, दु:ख का ही ऐसा रूप है, जिससे तकरीबन हर इंसान हर रोज किसनी न किसी तरह दो-चार होता है। चिंता तन के साथ मन और व्यवहार में बुरे बदलाव लाती है। यही कारण है कि चिंता को दूर रखने के लिये जरूरतों, अपेक्षा या उम्मीदों को पर काबू रखना बेहतर उपाय है।

वहीं, अशांति और चिंता से बचने के धार्मिक उपायों की बात होती है तो शास्त्रों में भगवान श्री गणेश चिंताहरण देवता के रूप में पूजनीय माना गया है।

बुधवार को श्री गणेश पूजा का बैचेनी, व्यग्रता और कष्टों से निजात पाने के लिए विशेष महत्व है। शास्त्रों में इस दिन एक ऐसे गणेश मंत्र का स्मरण शुभ माना गया है, जो आस्था और श्रद्धा से बोलने पर मन को भरोसा व हौंसला देकर हर चिंता का अंत करता है। जानते हैं बुधवार के लिए श्री गणेश पूजा की सरल विधि के साथ यह चिंताहरण मंत्र -

- सुबह स्नान कर भगवान श्री गणेश की आराधना घर या देवालय में करें।

- श्री गणेश की पूजा में चंदन, अक्षत, पीले फूल, अबीर, गुलाल, दूर्वा, सिंदूर, चढ़ाएं। यथाशक्ति मोदक यानी लड्डुओं का भोग लगाएं।

- पूजा के बाद इस चिंता या शोक हरने वाले श्री गणेश मंत्र की यथाशक्ति माला करें या किसी भी परेशानी के समय स्मरण कर मन ही मन जाप करें -ऊँ नमो विघ्रहराय गं गणपतये नम:।।

इसके साथ नीचे लिखा पौराणिक मंत्र भी शोक या चिंताओं का नाश करने में बहुत असरदार होता है-

गजाननं भूत गणादि सेवितं कपित्थ जम्बू फल चारूभक्षणं।

उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्रेश्वरपादपंकजम।।

- मंत्र स्मरण व पूजा कर गणेश आरती करें। आरती व प्रसाद ग्रहण करें।  

Saturday, May 12, 2012

एक घी के दीपक से बदल जाएंगे आपकी कुंडली के ग्रह-नक्षत्र




ज्योतिष में बताए गए नौ ग्रहों में से शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना गया है। इसके साथ ही राहु और केतु भी सामान्यत: अशुभ ग्रह ही माने जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली यह तीनों ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो उसे हमेशा ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन तीनों ग्रहों का आपस में गहरा संबंध है। शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं। इन तीनों ग्रह के लिए एक सटीक उपाय बताया गया है। इस एक तीनों ही ग्रहों के दोष दूर हो जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या राहु-केतु के कालसर्प योग से त्रस्त है तो उसे हर शनिवार की रात किसी पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं। इस समय व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। इसके साथ ही शनि, राहु, केतु और अपने इष्टदेव से प्रार्थना करें। इस उपाय से कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे। शनि, राहु या केतु की वजह से यदि किसी व्यक्ति के जीवन में धन संबंधी या अन्य कोई परेशानियां हो तो वे दूर हो जाएंगी। रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाएंगे।

संतान चाहिए? ये ज्योतिषीय उपाय करें...

संतान चाहिए? ये ज्योतिषीय उपाय करें...
यह मुख्य विषय प्रारब्ध एवं भाग्य संबंधी होता है। किंतु ठीक उपाए कर लिए जाएं तो संतान की प्राप्ती निश्चित होती है।

पहला उपाए- संतान गोपाल मंत्र के सवा लाख जप शुभ मुहूर्त में शुरू करें। साथ ही बालमुकुंद (लड्डूगोपाल जी) भगवान की पूजन करें। उनको माखन-मिश्री का भोग लगाएं। गणपति का स्मरण करके शुद्ध घी का दीपक प्रज्जवलित करके निम्न मंत्र का जप करें।
मंत्र
ऊं क्लीं देवकी सूत गोविंदो वासुदेव जगतपते देहि मे,
तनयं कृष्ण त्वामहम् शरणंगता: क्लीं ऊं।।

दूसरा उपाए- सपत्नीक कदली (केले) वृक्ष के नीचे बालमुकुंद भगवान की पूजन करें। कदली वृक्ष की पूजन करें, गुड़, चने का भोग लगाएं। 21 गुरुवार करने से संतान की प्राप्ती होती है।

तीसरा उपाए- 1 प्रदोष का व्रत करें, प्रत्येक प्रदोष को भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करने से संतान की प्राप्त होती है।

चौथा उपाए- गरीब बालक, बालिकाओं को गोद लें, उन्हें पढ़ाएं, लिखाएं, वस्त्र, कापी, पुस्तक, खाने पीने का खर्चा दो वर्ष तक उठाने से संतान की प्राप्त होती है।

पांचवां उपाए- आम, बील, आंवले, नीम, पीपल के पांच पौधे लगाने से संतान की प्राप्ति होती है।

सावन में भगवान पार्थिव लिंग के अभिषेक

सावन में भगवान पार्थिव लिंग के अभिषेक

शिव की प्रसन्नता के लिए शिव स्तुति और स्त्रोत का पाठ करने का विशेष महत्व है। इन स्त्रोतों में शिव महिम्र स्त्रोत सबसे प्रभावी माना जाता है। इस स्त्रोत का पूरा पाठ तो शुभ फल देने वाला है ही, बल्कि यह ऐसा देव स्त्रोत है, जिसका कामना विशेष की पूर्ति के लिए प्रयोग भी निश्चित फल देने वाला होता है।
शिव महिम्र स्त्रोत के इन प्रयोगों में एक है - पुत्र प्राप्ति प्रयोग। पुत्र की प्राप्ति दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा सुख माना जाता है। इसलिए हर दंपत्ति ईश्वर से पुत्र प्राप्ति की कामना करता है। अनेक नि:संतान दंपत्ति भी पुत्र प्राप्ति के लिए धार्मिक उपाय अपनाते हैं। शास्त्रों में शिव महिम्र स्त्रोत के पाठ से पुत्र प्राप्ति का उपाय बताया है। जानते है प्रयोग विधि -
- पुत्र प्राप्ति का यह उपाय विशेष तौर पर सावन माह से शुरु करें।
- स्त्री और पुरुष दोनों सुबह जल्दी उठे। स्त्री इस दिन उपवास रखे।
- पति-पत्नी दोनों साथ मिलकर गेंहू के आटे से ११ पार्थिव लिंग बनाए। पार्थिव लिंग विशेष मिट्टी के बनाए जाते हैं।
- पार्थिव लिंग को बनाने के बाद इनका शिव महिम्र स्त्रोत के श्लोकों से पूजा और अभिषेक के ११ पाठ स्वयं करें। अगर ऐसा संभव न हो तो पूजा और अभिषेक के लिए सबसे श्रेष्ठ उपाय है कि यह कर्म किसी विद्वान ब्राह्मण से कराएं। पार्थिव लिंग निर्माण और पूजा भी ब्राह्मण के बताए अनुसार कर सकते हैं।
- पार्थिव लिंग के अभिषेक का पवित्र जल पति-पत्नी दोनों पीएं और शिव से पुत्र पाने के लिए प्रार्थना करें।
- यह प्रयोग २१ या ४१ दिन तक पूरी श्रद्धा और भक्ति से करने पर शिव कृपा से पुत्र जन्म की कामना शीघ्र ही पूरी होती है।

पुत्र प्राप्ति के लिए संतान गणपति स्तोत्र

 
पुत्र प्राप्ति के लिए संतान गणपति स्तोत्र

नमो स्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च ।
सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च ।।
गुरूदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते ।
गोप्याय गोपिताशेषभुवना चिदात्मने ।।
वि
Ÿवमूलाय भव्याय विŸवसृष्टिकराय ते ।
नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुण्डिने ।।
एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नम: ।
प्रपन्नजनपालाय प्रणतार्तिविनाशिने ।।
शरणं भव देवेश संतति सुदृढां कुरू ।
भवष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ।।
ते सर्वे तव पूजार्थे निरता: स्युर्वरो मत: ।
पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धप्रदायकम् ।।

Thursday, March 1, 2012

गुरुवार को बृहस्पति पूजा

गुरुवार को बृहस्पति पूजा में बोलें यह विष्णु मंत्र और सत् एवं सफल जीवन की कामना करे

गुरु की शरण सभी कमियों और दु:खों से मुक्त कर देती है। मोटे तौर पर अज्ञानता ही शारीरिक, मानसिक या भौतिक जीवन के सारे कष्टों का कारण है। गुरु, ज्ञान द्वारा ही विद्या के अभाव को दूर कर मन व जीवन को समृद्ध बना देते हैं।

शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप बताया गया है। गुरु बल ही ईश कृपा को संभव बना देता है। गुरुवार गुरु भक्ति से ही उन कमियों और दोषों को दूर करने का दिन जो जीवन में अशांति और कलह का कारण होते हैं। ज्ञान के देवता गुरु बृहस्पति माने गए हैं।

शास्त्रों के मुताबिक बृहस्पति पूजा न केवल वैवाहिक दोष, बल्कि हर तरह से दक्षता, समृद्धि व शांति देने वाली मानी गई है। गुरु की प्रसन्नता के लिए इस दिन खासतौर पर विशेष रूप से केले के वृक्ष की पूजा का महत्व है। केले का वृक्ष विष्णु का रूप भी माना गया है।

यही कारण है कि गुरुवार को अगर विशेष पीली सामग्रियां अर्पित करने के साथ विशेष विष्णु मंत्र का ध्यान कर गुरु बृहस्पति की पूजा की जाए तो यह भरपूर सुख पाने की कामनासिद्धि का अचूक उपाय माना गया है।

- गुरुवार को केले के वृक्ष के नीचे या देवालय में केल के पत्तों के बीच एक चौकी पर पीले वस्त्र बिछाकर बृहस्पति व विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। पीली गाय के दूध से बृहस्पति व विष्णु को स्नान कराएं। पीले फूल, पीला चंदन, गुड़, चने की दाल, पीले वस्त्र दोनों देवताओं को अर्पित करें। भोग में पीले पकवान या पीले फल अर्पित करें।

- पूजा के बाद गुरु मंत्रो के स्मरण के साथ नीचे लिखें विष्णु मंत्र स्त्रोत का विशेष ध्यान कर विवाह, धन, सुख की कामना करें व अंत में बृहस्पति-विष्णु की आरती घी के दीप से ही करें -

श्रीनिवासाय देवाय नम: श्रीपयते नम:।

श्रीधराय सशाङ्र्गाय श्रीप्रदाय नमो नम:।।

श्रीवल्लभाय शान्ताय श्रीमते च नमो नम:।

श्रीपर्वतनिवासाय नम: श्रेयस्कराय च।

श्रेयसां पतये चैव ह्याश्रयाय नमो नम:।

नम: श्रेय:स्वरूपाय श्रीकराय नमो नम:।।

शरण्याय वरेण्याय नमो भूयो नमो नम:।

स्त्रोत्रं कृत्वा नमस्मृत्य देवदेवं विसर्जयेत्।।

इति रुद्र समाख्याता पूजा विष्णोर्महात्मन:।

य: करोति महाभक्त्या स याति परमं पदम्।।

Sunday, February 5, 2012

How to Judge Diseases

How to Judge Diseases


Before we begin, I would suggest going through some of the good books on Medical Astrology. Medical Astrology, A Rational Approach is a good book, so is Jyotish Aur Rog (ज्योतिष और रोग), written by Pt. Kisanlal Sharma. This book is published by Manoj Pocket Books and should be available everywhere. The language and style of writing is very good. These books have a table for planets/rashi/bhava in relation to most common diseases and it makes for a good reference.

This is how we should start the study of a horoscope for diseases. Look up the reference body part, study the association with an agent and then predict diseases during the dasha period of all the planets involved.

Reference body part:
•Understand that organs and body parts are referenced by a house (bhava), rashi and a planet.
•The planet representing an organ in their natural tendencies are the Karakas. The planets that represent an organ through house ownership are the Lords.
•Bad aspect/association of both these type of planets shows up as a disease.
•E.g. Sun is the natural Karaka for heart. In a horoscope, 4th house represents heart. Hence to judge for heart disease, we should look at influence on both Sun as well as lord of 4th house. If one of these factors is strong, the effect of the disease are not likely to show up. If both are weak, then the problems will be worse.

Agents causing disease:
•In a horoscope, association of the Lord of 6th house with any of the planets will show up as a disease. If both the Karaka and Lord are associated with 6th lord, then problems will be magnified.
•Position of planets in 6th house in the horoscope causes problems.
•The planet Mars signifies wounds and injuries due to accidents, etc.
•Rahu is responsible for suddenness.
•Saturn represents chronic diseases.

Please note that association and aspect by an agent is essential. Weakness of the Karaka/Lord is important. General Weakness, but not amounting to disease should be looked at very carefully. If a planet is debilitated or is associated with other inimical houses, e.g. 12th and 8th, it will not cause disease by itself. However, it will signify general weakness and lack of development for that body part.

Progeny in Vedic Astrology

Progeny in Vedic Astrology


A birth in the family is matter of great joy for everyone. The institution of marriage is created to protect the unit of family and provide the greatest care to children who will carry forward humanity on our planet. This article attempts to briefly look at the factors that bestow the blessings of childbirth to a couple. It is important to analyze the chart of both husband and wife in order to come to any conclusion.

In Vedic Astrology, the process starts right at the time when charts are matched at the time of marriage. Afflictions to 7th house and its lord can adversely impact the fertility of a person. Nadi dosha can lead to conception followed by mishaps like still birth, miscarriages etc. Nadi dosha is therefore considered a strict no-no for horoscope compatibility. These factors therefore must be avoided while kundalis are being matched.

What I am not going to discuss in this article is determination of sex of children. It may have been okay in the past, but in current age and time, it is not right. It is my humble opinion that couples should not engage in such activities.

The following elements are important from perspective of having children:
a.Naisargika Putrakaraka, i.e. Jupiter.
b.Fifth house and its lord
c.Divisional chart Saptamsha
d.9th house, by the principle of bhavat bhavam. 9th house is considered to be important when looking at the horoscope of women.
e.Dasha factors – to determine if the currently running dasha is conducive towards conception.

Any afflictions to these factors or elements would be considered detrimental to the ability of having children. The usual afflictions come from Saturn, Mars etc., and lords of 6th and 8th houses. Based on these rules, some of the yogas or combinations that can potentially lead to childlessness are:
•Lord of 5th house in debilitation or positioned in 6th, 8th or 12th house. This yoga should also applicable to lord of 5th from Sun or Moon.
•Malefic influence of Sun and/or Mars on 5th house and its lord. The influence could be through presence, drishti (aspect) or by hemming the house. These are fiery planets and they “burn away” the prospects of having children.
•Malefic influence of Saturn and Mercury as these are considered to be impotent planets.
•Malefic influence of 6th and 8th lords on 5th house as explained above. 6th house is important as by being 2nd from 5th, it becomes a maraka for factors determined by 5th, i.e. children. The lord of 6th house carries this power.
•Jupiter’s presence in 6th or 8th house.
•Planets powerless in Saptamsha

Very interestingly, Rahu is not a part of this list of malefic planets. I would like to quote from Dr. Raman’s book, Combination #220:


Rahu in 5th house in a Navamsha other than that of Saturn gives rise to bahuputra (large number of children) yoga.

There are various curses or sutakshaya yogas that are mentioned in Dr. B.V. Raman’s book “Three Hundred Important Combinations” that lead to loss of children – please go through combinations #212 through #219 for the same. All these combinations revolve around afflictions of 5th house and its lord but rather than being general statements, the combinations are properly defined.

Any good influence benefic planets, but most importantly Jupiter, would mitigate the problem. In such a case, the couple would not be denied of children, but rather miscarriages and difficulty in conception should be predicted. Influence from Rahu also brings in a degree of “unusual”.

These problems could very well be solved by appropriately seeking medical help. Astrologically, it would be necessary to strengthen Jupiter and 5th lord to overcome such problems. Worshipping Lord Krishna in His “Santan Gopal” form helps.

Astro Analysing Female Diseases and Disorders

Astro Analysing Female Diseases and Disorders
The strictly female anatomical organs include the ovaries, uterus, cervix, fallopian tubes, vagina, vulva and the breast.
The primary function of these organs is the reproduction; disorders affecting these organs may often result in infertility and impotency.
Female anatomical disorders are very common; many women will develop the symptoms of one or more of them during their lifetime.
Causes of female disorders: Age, genetic factors, hereditary factors, sexually transmitted diseases, hormone imbalance, infections, malnutrition and obesity.
Early astrological detection is imperative in the success rate of recognizing and treating all female disorders.
Factors responsible for female disorders
• Ascendant: general vitality
• 6th house: indicates diseases
• Venus /7th house/ sign Libra: indication of uterus and ovaries, inflammation of uterus and ovaries diseases of ovaries, venereal complaints, typhoid, diseases of generative organs, diabetes, hormonal disorder genital troubles, venereal diseases the internal parts of the generative organs, produces complaints caused by excesses sexual pleasures.
• Moon/ 4th house: Moon: Brest, womb, blood, glandular system, tumours, female reproductive organs, diabetes, anaemia, nervous, asthma, menstrual disorder, diseases of uterus, and hormonal problems due to ovary hormones.
• 8th house/ sign Scorpio: death, trouble in womb and ovaries, chronic incurable diseases.
• Jupiter: significator of tumours and a cancer, arterial system
• Saturn: obstruction, acids, chronicity, incurability, glandular diseases, depression, injuries sustain from the fall, different forms of cancers, tumours.
• Mars: bleeding, inflammation in body, haemoglobin, injuries, infection and contagious diseases, haemorrhoids, diseases of uterus, miscarriages and abortions.
• Rahu: contagious diseases, undignostic diseases, intoxication, worries, phobia, psychological disorder
• Ketu: injuries, accidents, fevers, infections, mysterious diseases, surgery.
Different astrological combinations for female disorders
Common female organ disorders:
Pelvic inflammatory disease, endometriosis PMS, menstrual disorders
• Saturn in sign Scorpio, placed in the 8th house will give diseases of reproductive organs throughout life.
• Affliction to Moon and Mars in a female astrology chart creates disturbance in menstrual cycles.
• Afflicted 8th house/lord and sign Scorpio indicate generative organs problems.
• Mars afflicting 7th /8th house and Moon induces endometriosis.
• Venus square Mars gives congestion or the surplus blood being stored in the walls of the uterus or endometriosis.
• Moon and 8th house/lord afflicted by Mars indicates excess bleeding in menstrual cycle and pelvic inflammatory diseases.
• Malefic aspects on lords of 6th and 8th houses, guarantees the presence of venereal diseases or some other disorders of the genital system.
• Mars and Rahu posited in 7th indicate excess bleeding.
• Moon and 8th house/lord afflicted by Saturn indicate scanty flow in menstrual cycle with severe pain.
• Mars in the 6th house is an indication of acute illness of the genitals (bleeding and inflammation).
• Venus posited in 6th/8th/12th house indicates common female genitals disorders.
• Lord of ascendant/6th, conjunct with Mercury and Rahu is the sure indication of female disorders.
• 7th house/lord afflicted by Mars stands for inflammation and endometriosis.
Ovaries disorders:
Include ovarian cysts, polycystic ovary syndrome and ovarian cancer.
• Afflicted sun/moon in sign Scorpio indicates ovarian disorder.
• Venus affliction or Moon Square Mars can bring ovary complaints or trouble.
• 7th house/lord aspected afflicted Moon/Venus can give the polycystic ovary syndrome.
• 7th/8th house/lord and Venus afflicted by Saturn and Rahu indicates ovary cancer.
Uterus disorders:
Include fibroids, uterine polyps, prolapsed uterus and uterine cancer.
• 8th lord /house is malefic in nature/ posited in inimical sign/debilited/ set/ hammed between malefic/ conjunct and aspected by malefic, indicates uterus problems.
• Lords of 6th and 8th related to each other indicate uterus disorders.
• 8th lord/house and Moon are afflicted by Saturn and Rahu indicates uterus cancer.
• Lord of 8th placed in 6th/12 house and aspected by Saturn and Rahu indicates uterus cancer.
• 6th lord is placed in 8th/12 and aspected by Saturn and Rahu indicates uterus cancer.
• Moon /8th house/sign Scorpio afflicted by Ketu indicate uterus fibroids.
Blocked fallopian tubes
• Venus/Moon being afflicted by Saturn/Rahu indicates blockage in fallopian tubes.
• 7th/8th house afflicted by Saturn and Rahu indicates obstruction in fallopian tubes.
Breast disease:
Breast cancer/tumours/lumps
• Moon/sign Cancer being afflicted by Saturn indicates lumps in breast.
• Moon/4th house/sign Cancer badly afflicted by Ketu indicate lumps in the breast.
• Moon /4th house associating with weak Jupiter indicate the symptoms of non cancerous tumours on the breast.
• 4th house/lord being afflicted by Saturn and Rahu indicates cancerous tumour in the breast.
• Moon/sign Cancer is afflicted by Saturn and Rahu indicated breast cancer.
• 4th lord posited in 6th/8th/12th house being aspected by Saturn/Rahu indicates breast cancer.
• Lord of the 6th/8th/12th house placed in 4th house and aspected by Saturn and Rahu indicates breast cancer.
Vaginal/ bladder / urinary tract infection
Women are more prone to these infections because the female urethra is shorter than the males and bacteria/virus/yeast can move up to the bladder/vagina more quickly in women.
• Lords of 4th and 7th posited in 6th/8th /12 house indicates urinary tract infection.
• Lords of 4th and 7th are placed in an inimical sign and aspected by malefic indicates urinary tract infection.
• Mars in Libra/7th house may cause inflammation of urinary tract by infection.
• Lord of 6th/7th placed along with lord of 12th and aspected by Saturn indicates venereal infection.
• 8th house/lord and Venus afflicted by Rahu indicates venereal infections.
• Any affliction to Libra/ 7th house or lord by Saturn gives rise to diseases concerning kidney, bladder and the pelvic region.
• Afflicted Venus in Libra may cause suppression of urine and uraemia.
• Moon, Venus and lord of ascendant combine with the Sun and Rahu; the native may suffer from syphilis.
• Malefic aspects of Saturn, on Scorpio /8th house, are a predisposition for a bladder stone.
• Sun in 6th being aspected by Saturn indicates loss of vitality due to excess sex.
Osteoporosis
Although not a disease restricted to females, osteoporosis seems to prey most often women over the age of 60.Osteoporosis is caused by low amounts of phosphate and calcium in bones, causing them to be porous, brittle and more apt to break.
• Afflicted Saturn /sign Capricorn indicates osteoporosis
• Afflicted Sun/sign Leo or Jupiter / sign Sagittarius indicate low bone density
• Sun posited in 6th/8th/12th house, debilited, conjoined or aspected by malefic planets, gives bone weakness.

Tuesday, November 15, 2011

राशि के स्वामी ग्रह की अनुकूलता (Lord of Rashi)

राशि के स्वामी ग्रह की अनुकूलता के लिए शिवोपासना बेहतर उपाय है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव हर ग्रह की पीड़ा हर सकते हैं शास्त्रों में उल्लिखित है कि जन्मकुंडली में चाहे कितनी भी पीड़ा क्यों न हो, अगर सच्चे मन से शिवोपासना की जाए, तो सभी ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति पाई जा सकती है। विशेषकर शिव के प्रिय मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप बड़ी से बड़ी ग्रह बाधा को भी दूर कर सकता है। इस मास में शिवोपासना के साथ राशि के स्वामी ग्रह को प्रबल बनाकर जीवन में सुख-शांति और समृद्धि पाई जा सकती है।


मेष राशि के जातक अगर अपने ग्रह स्वामी मंगल को शांत रखने के लिए श्रावण मास में प्रत्येक मंगलवार अथवा पूरे मास में बेलपत्र पर सफेद चंदन से श्रीराम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें, तो इन्हें शिव कृपा मिलती है।

वृष राशि के जातक यदि ग्रह स्वामी शुक्र को शांत रखने के लिए शुक्रवार का व्रत रखें और शिवलिंग का दूध-दही से अभिषेक करें तथा भगवान का सफेद चंदन से तिलक करें, तो लाभ होगा। साथ ही हरशृंगार के फूलों से बनी माला भी भगवान को अर्पित करें, तो कार्यों में बाधा नहीं आएगी।

मिथुन राशि वालों को बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए श्रावण मास में भगवान शिव का शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए। इसके बाद गाय को हरी घास खिलाने से वर्ष भर आर्थिक संपन्नता बनी रहती है।

कर्क राशि के जातक चंद्रमा की शांति के लिए श्रावण मास में भगवान शिव को दूध, दही, गंगाजल व मिश्री से स्नान कराएं। इससे उनका चित्त भी शांत रहेगा और बाधाएं भी दूर होंगी।।

सिंह राशि वाले जातक स्वामी ग्रह सूर्य की प्रसन्नता हेतु श्रावण मास में शुद्ध देसी घी से भगवान शिव को स्नान कराएं, तो वह सदैव अपने शत्रुओं से सुरक्षित रहेंगे। साथ ही आर्थिक संकट से भी बचे रहते हैं।

कन्या राशि वाले बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए श्रावण मास में दूध और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, मदार के पुष्प, धतूरा एवं भांग अर्पित करें, तो अपयश अथवा आर्थिक हानि से पूर्णत: बच सकते हैं।

तुला राशि वाले जातक शुक्र ग्रह को खुश करने के लिए श्रावण मास में दही और गन्ने के रस से शिवलिंग को स्नान कराएं तथा पूजन के बाद गरीबों को मिश्री दान करें, तो पूरे वर्ष समस्याओं से लड़ने की शक्ति मिलेगी।

वृश्चिक राशि के जातक अगर मंगल ग्रह को खुश करना चाहते हैं, तो श्रावण मास में शिवलिंग पर तीर्थस्थान का जल तथा दूध में शक्कर एवं शहद मिलाकर स्नान कराने के बाद रक्त चंदन से तिलक करें, तो लाभ मिलता है और शत्रु परास्त होते हैं।

धनु राशि के जातक बृहस्पति ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए श्रावण मास में कच्चे दूध में केसर, गुड़ व हल्दी मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं। तत्पश्चात हल्दी व केसर से तिलक करें, तो वह आर्थिक संकट में नहीं फंसते। विद्यार्थी वर्ग को भी लाभ होता है।

मकर राशि के जातक अपने स्वामी ग्रह शनि को प्रसन्न करने के लिए घी, शहद, दही और बादाम के तेल से शिव का अभिषेक करें तथा नारियल के जल से स्नान कराकर नीले पुष्प अर्पित करें, तो शत्रुबाधा एवं मानसिक कष्ट से राहत मिलती है।

कुंभ के जातक यदि इस मास में भगवान शिव को भस्म मिश्रित गंगाजल से स्नान कराने के बाद सरसों के तेल का तिलक लगाएं, तो ये शारीरिक कष्ट, धनहानि, पारिवारिक कष्ट आदि बाधाओं से बचते हैं।

मीन राशि के जातक अपने ग्रह स्वामी बृहस्पति की कृपा पाने के लिए यदि श्रावण मास में भगवान शिव को कच्चे दूध में हल्दी मिलाकर अर्पित करें और इसके बाद केसर का तिलक करें। पीले पुष्प तथा केसर के रेशे अर्पित करें, तो इन्हें समस्त सुख मिलते हैं।

वक्री ग्रह शुभ फल देते हैं

सौर सिद्धांत के अनुसार ग्रह को अपनी-अपनी कक्षा में भ्रमण करते हुए विभिन्न प्रकार की गति मिलती है। मसलन वक्रा, अति वक्रा, शीघ्रा, शीघ्रा-तरा, मंद, मंतरा, सम, कुटिल आदि। यहां वक्र गति का अर्थ है, ग्रहों का अपने भ्रमण पथ पर उल्टी गति से चलना। पर वास्तव में ग्रह उल्टे चलते नहीं हैं। पृथ्वी की गति तथा ग्रह की गति के भेद एवं उस ग्रह की पृथ्वी से विशेष दूरी पर स्थित होने की वजह से ही वह वक्री प्रतीत होता है। वैसे नौ ग्रहों में सूर्य और चंद्र कभी वक्री नहीं होते। राहु तथा केतु सदा वक्री चलते हैं।

•अगर वक्री ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित हो, तो अपनी नीच राशि में होने का फल देता है। पर नीच राशि में वक्री ग्रह अपनी उच्च राशि का शुभ फल देता है।
•यदि वक्री ग्रह के साथ कोई ग्रह स्थित हो, तो उसके सानिध्य में वह और बलवान हो जाता है। इस वजह से जातक को शुभ अथवा अशुभ फल मिलता है।
•यदि अशुभ ग्रह अशुभ भाव में वक्री हो, तो अशुभता में वृद्धि हो जाती है। परंतु शुभ भाव में अशुभता में कमी आ जाती है।
•यदि कुंडली में लग्नेश केंद्रस्थ होकर वक्री हो जाए, तो यह अत्यंत शुभकारी होता है।
•इसी प्रकार वक्री ग्रह का संबंध यदि सप्तम भाव से है, तो जातक के विवाह में विलंब होता है।
•अगर वक्री ग्रह का संबंध केंद्र या त्रिकोण से हो अथवा त्रिकोण, केंद्र का स्वामी वक्री होकर शुभ भाव में पहुंच जाए, तो यह जातक की कुंडली में अति शुभ फल का संकेत है।
ग्रहो से जाने: मेरा रोज़गार क्या होना चाहिए?






सभी नौ ग्रहों का अलग-अलग प्रभाव माना जाता है। मान्यता यह भी है कि व्यक्ति अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल करता है, उसमें ग्रह विशेष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खासकर कैरियर के मामले में तो ग्रहों को ज्यादा उत्तरदायी माना जाता है। यानी ग्रह की भूमिका ही हमारे जीवन में कैरियर की दिशा तय करती है। ऐसे में अगर ग्रह की कृपा हुई, तो जातक शिक्षक भी बन सकते हैं या चिकित्सा के क्षेत्र में भी सफलता का परचम लहरा सकते हैं।




शिक्षक

एक अच्छे शिक्षक की कुंडली पर बृहस्पति ग्रह की कृपा होनी आवश्यक है। ऐसा इसलिए क्योंकि यही ग्रह शिक्षा पर राज करता है। कुंडली में चौथा घर जातक के जीवन में शैक्षणिक दृष्टि से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। शिक्षक का काम केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि बच्चों को संभालना भी होता है, ऐसे में कुंडली में पांचवां घर भी महत्वपूर्ण हो जाता है।




डॉक्टर

यह दुनिया का सबसे चर्चित प्रोफेशन है। इस प्रोफेशन में जाने को इच्छुक लोगों पर भी बृहस्पति की विशेष कृपा होनी आवश्यक है। वैसे भी बृहस्पति को प्रोफेशनल्स का ग्रह कहा जाता है। कुंडली में दसवां या पांचवां घर आरोग्य का माना जाता है, जिससे इस ग्रह का गहरा संबंध है। साथ ही अगर किसी जातक की कुंडली में 12वें घर में यह ग्रह मजबूती से बैठा हो, तो जातक के चिकित्सक बनने के मौके बढ़ जाते हैं।




संगीत

किसी भी जातक को संगीत के क्षेत्र में कुछ अच्छा करने के लिए शुक्र ग्रह की कृपा आवश्यक होती है। अगर कुंडली में तीसरे घर में शुक्र है, तो जातक खुद ही कला के क्षेत्र में उच्चतम योग्यता हासिल करता है। वैसे शास्त्रीय गायन में बृहस्पति ग्रह की भूमिका रहती है। जबकि रॉक और आधुनिक गायन में राहु से मदद मिलती है। इसी प्रकार संगीत वाद्यों को बजाने महारत हासिल करने में बुध ग्रह और गायन के लिए चंद्रमा का बलवान होना आवश्यक होता है।




आर्किटेक्ट

भूमि और घर का संबंध जातक की कुंडली में चौथे घर से होता है, पर इनके साथ मंगल और शनि को भी शुभ स्थान पर होना चाहिए। मंगल इमारतें बनाने की क्षमता विकसित करता है, जबकि शनि को भूखंड का ग्रह माना जाता है। बृहस्पति ग्रह जातक को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में अतिरिक्त योग्यता भी दे सकता है।




योगशास्त्री

आजकल योग में भी कैरियर है। इस प्रोफेशन में जाने के लिए किसी भी व्यक्ति को कुछ ग्रहों की एक साथ सकारात्मकता की आवश्यकता होती है। अच्छे आत्मविश्वास के लिए पहले घर में ग्रहों की कृपा होनी चाहिए। साथ ही दूसरे घर पर ग्रहों की कृपा हो, तो जातक परिवार एवं धन से संपन्न होता है। इसके अलावा चौथे, पांचवें और सांतवें घर में ग्रहों की शुभता हो, तो यह जातक की शादी का संकेत देता है।




प्रबंधन

अगर जातक की कुंडली में पहला, पांचवां और दसवां घर मजबूत स्थिति में है, तो प्रबंधन के क्षेत्र में जातक अच्छा टीम लीडर बन सकता है। साथ ही सूर्य की शुभता मिल जाए, तो जातक को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। मंगल की शुभता की भी आवश्यकता होती है।




खेल

खिलाड़ी बनने के लिए मंगल ग्रह की शुभता की ज्यादा आवश्यकता होती है। साथ ही उत्साह के लिए तीसरे, खेल के चुनाव के लिए तीसरे और प्रतिद्वंद्वी क्षमता में बढ़ोतरी के लिए छठे घर का मजबूत होना जरूरी है। खिलाड़ी जातक की कुंडली में बुध ग्रह का मजबूत होना जरूरी होता है।

प्रोफेशन कोई भी हो, ग्रहों की कृपा आवश्यक रूप से चाहिए। ऐसे में कोई भी ग्रह किसी भी जातक के लिए कैरियर बनाने में महत्वपूर्ण हो सकता है

शक्तिशाली रोग निवारक मंत्र

शक्तिशाली रोग निवारक मंत्र

मनुष्य के जीवन में तरह-तरह की शारीरिक व्याधियां आती जाती रहती हैं। विभिन्न रोगों से ग्रसित मनुष्य डॉक्टर, वैद्य और हकीम के चक्कर लगाने को मजबूर होता है और धनाभाव के कारण कभी-कभी उचित उपचार से वंचित भी रह जाता है। ऐसी दशा में शक्तिशाली रोग निवारक मंत्र का जप फलदायी होता है।

‘ॐ क्री क्षं सं सं स:’, मंत्र 108 बार जप कर गाय के घी को अभिमंत्रित कर लें। अभिमंत्रित घी का एक पल की मात्रा में एक माह तक प्रतिदिन दान करने और उसके बाद मधु पान करने से सब प्रकार के रोग खत्म हो जाते हैं। यदि इस घी को पीने के बाद एक माह तक गाय का दूध पिया जाए, तो आंखों की रोशनी बढ़ती है। यदि इस घृत को चावल के लड्डू के साथ सेवन किया जाए, तो शूल रोग का नाश होता है। अथवा इस घी को गन्ने के रस के साथ नियमित सेवन करने से रोगी की अनेक व्याधियां नष्ट होती हैं।

‘क्रीं’ मंत्र को 108 बार उच्चरित करने के बाद एक कटोरी गंगा जल को इस मंत्र से 21 बार अभिमंत्रित कर रोगी को पिलाने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह प्रक्रिया सात दिन तक निरंतर करनी चाहिए।

यदि ‘क्रीं हूं, ह्रीं,’ मंत्र का उच्चारण कर सात बार श्री महाकाली देवी को चावल अर्पित किए जाएं, तो भय का नाश होता है।

नागेश्वर की जड़ को मधु यानी शहद के साथ ‘ॐ नम: दर्शनाय’ का उच्चारण करते हुए घिसे और उदर रोगी को पिला दें, तो लाभ होता है।

यदि ‘ॐ शक्तिदाय नम:’ मंत्र का 108 बार उच्चारण पुनर्नवा का रस व गाय के घी को अभिमंत्रित कर सेवन करें, तो आंखों की ज्योति बढ़ती है।

राशि के अनुसार कैसा रहेगा, शनिदेव का घर बदलना

नवंबर का माह की 15 तारीख को शनिदेव अपनी राशि बदल रहे हैं। इस बार शनिदेव अपनी उच्च राशि तुला में प्रवेश करेंगे। इससे पहले वह कन्या राशि में विराजमान थे। ऐसे में कई जातकों को इनकी कृपा मिलेगी, तो कुछ जातकों को अपने कर्मों का फल भी मिलेगा। आप यह मत सोचना की शनि क्या कर लेगा? क्योकि शनि ही इस समय राजा को रंक और रंक को राजा बनाता हैं। अत: बुरा कर्म करने वाले सावधान! तीना चीज कभी अंडर एस्टीमेट मत करना।

"पिंगलाय, कृष्णाय, शनैश्चर"

मेष- तुला राशि में बैठे शनि की पूर्ण दृष्टि मेष राशि पर रहेगी। इसलिए इस राशि वाले जातकों का कार्य धीमी गति से चलेगा। पर परिस्थिति में सुधार होगा। अगर मेष का स्वामी मंगल कमजोर है, तो उसे बलवान करने का उपाय करें।

वृष - यह राशि शनि से अष्टम और वृषभ से शनि छठे स्थान पर होने के कारण, तुला का शनि, वृषभ राशि वालों को शुभ फल नहीं देगा। तुला का शनि, वृषभ राशि वालों को गृह क्लेश, मानसिक अस्थिरता प्रदान करेगा।

मिथुन - इस राशि से शनि पंचम और शनि से मिथुन राशि नवम होगी। अत: मिथुन राशि वालों को शनि शुभ फल प्रदान करेगा। विपरीत परिस्थितियों में सुधार होगा। अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे। मन प्रसन्न व उत्साहित रहेगा।

कर्क - कर्क राशि से शनि चतुर्थ होगा और शनि से कर्क राशि दशम होगी। इसलिए शुभ फलों की प्राप्ति प्रचुर मात्रा में इस राशि के जातकों को मिलेगी। बेरोजगारों को आजीविका मिलेगी। वैवाहिक जीवन सफलतापूर्वक चलेगा।

सिंह - शनि की तुला राशि में आने पर सिंह के जातकों को लाभ ही होगा। 16 नवंबर तक इस राशि वालों को कष्ट है। इसके बाद अचानक धन लाभ, प्रतियोगिता आदि में सफलता, कार्य पूर्ण होने के योग हैं।

कन्या - दैवीय कृपा की प्राप्ति तुला का शनि देगा। व्यापार अथवा नौकरी के लिए किए गए सफल होंगे। सुख-शांति की अनुभूति होगी।

तुला - यह परिवर्तन तुला राशि वालों के लिए निराशाजनक स्थिति लेकर आएगा। रोगों से सावधान रहें, रक्तचाप, पेट संबंधी समस्याएं आदि से परेशानी होगी। व्यापार या नौकरी में गतिरोध उत्पन्न होगा।

वृश्चिक - इस राशि के जातकों को तुला का शनि मालामाल कर देगा। व्यापार बढ़ेगा, नवीन वाहन आदि लेने का योग है। शत्रुओं को परास्त करने में सफलता मिलेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

धनु - तुला का शनि धनु राशि वालों के लिए भी लाभदायक रहेगा। रुके या अटके कार्य पूरे होंगे। भूमि या संतान लाभ होगा। कोई प्रिय वस्तु दूर हो सकती है।

मकर - तुला का शनि मकर राशि वालों को शुभ फल नहीं देगा। धन या वस्तु, भूमि आदि की हानि हो सकती है। खर्च बढ़ेंगे। चोट-चपेट से सावधान रहें।

कुंभ - इस राशि वालों को भी तुला का शनि शुभ फल नहीं देगा। खान-पान में व्यवधान, धन हानि, शत्रुओं से कष्ट आदि की आशंका है।

मीन - तुला में शनि के आने के बाद मीन राशि के जातक शांति महसूस करेंगे। रोगों से छुटकारा मिलेगा, धन लाभ होगा और धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। यश मिलेगा।


शनिवार के दिन नारियल तेल में कपूर मिलाकर अपने शरीर पर मालिश करें। मालिश 21 या 51 शनिवार तक करें। 21 शनिवार तक साबुत काले उड़द सूर्यास्त के समय शनि मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:" बोलकर नदी में प्रवाहित करें।

प्रत्येक शनिवार को "ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय" मंत्र का 108 की संख्या में जप करें। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का भी 24 की संख्या में जप करें। वैसे पीपल के वृक्ष की पूजा भी शनिदेव की कृपा पाने के लिए अत्यंत लाभकारी उपाय माना जाता है। पीपल के वृक्ष को पितृ वृक्ष भी कहते हैं। इसके नीचे तेल का एक दीपक जलाएं, जल अर्पित करें और शिव मंदिर जाएं। शनिदेव की कृपा मिलेगी। हर शनिवार गरीबों को कचौरियां खिलाएं। अगर शनि मंदिर जा सकें, तो अतिउत्तम है।

महर्षि पिप्लाद ने इनकी संतुष्टि के लिए दस नामों की रचना की है। इन नामों का उच्चारण प्रतिदिन प्रातः काल स्नान करके करने से शनि की प्रतिकूलता, उनकी साढ़े साती, उनकी ढैया में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होकर उनकी कृपा होती है।

नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोऽस्तुते।

नमस्ते बभ्रुरुपाय कृष्णाय नमोऽस्तुते॥

नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चांतकायच।

नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो॥

नमस्ते मंदसंज्ञाय शनैश्चर नमोऽस्तुते।

प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्रणतस्य च॥

शनि से बचाएंगे हनुमान : हनुमान चालिसा

कुछ ही दिनों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावी शनि महाराज अपनी राशि बदल रहे हैं. शनि 15 नवंबर को कन्या राशि से तुला में जाएगा। अत: शनि के राशि बदलने से सभी राशि वाले लोगों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। शनि की स्थिति बदलने से आप पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े इसके लिए हनुमानजी की आराधना सर्वश्रेष्ठ उपाय है।


हनुमानजी की भक्ति करने वाले भक्तों को शनि अशुभ फल प्रदान नहीं करता है। इसी वजह प्रति मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। आपकी राशि जो भी हो, यह उपाय सभी के लिए श्रेष्ठ है। कुछ ही मिनट की ये उपासना आपको शनि के अशुभ प्रभावों से बचा लेगी।


हनुमानजी की भक्ति का सर्वोत्तम और सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का जप। प्रतिदिन कुछ समय श्रीरामजी के अनन्य भक्त पवनपुत्र हनुमानजी का ध्यान करने से जीवन खुशियोंभरा हो जाता है। यहां हनुमान चालीसा दी जा रही है जिसका जप आप किसी भी समय कर सकते हैं। मन को शांति मिलेगी।

हनुमान चालिसा


दोहा- श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

बुध्दिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥


चौपाई


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपिस तिहुँ लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै कांधे मूँज जनेऊ साजै॥

संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लषन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोइ लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेंइ सर्ब सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥

जो सत बर पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

दोहा- पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लषन सीता सहित,हृदय बसहु सुर भूप॥